हमारी सोच


हमारे मन मैं तरह तरह के विचार आते है….और कभी कभी ये विचार कुछ ज्यादा ही हो जाते है या फिर यूं कहे तो हर वक़्त सोते हुए भी सुबह उठते हुए भी

आखिर ऐसा क्यों होता है …तो इस सवाल से पहले

ये जान ले आप एक मानव है और हर इंसान की ये पहचान होती है …सोचना क्योंकि अगर आप नहीं सोचते है तो आपकी तुलना जानवर से होनी चाहिए ! क्योंकि जानवर ही ऐसा प्राणी है जो सोचता नहीं है ऐसा इसलिए मैं केह रहा हूँ !क्योंकि जानवर पर कोई भी मुसीबत आती है तो वो उसी वक़्त सोचता है इससे पहले वो अपने आप मैं मस्त रेहता है! तो सोचना गलत बात नहीं है …सोचना अच्छी ही नहीं बहुत अच्छी चीज़ है तो आपको खुश होना चाहिए क्योंकि आप सोचते हो…सोचने से आप के अंदर जो कुछ भी करने का होता है वो बहार आती है ।और जितना सोचोगे उतनी ही आप जिस काम को करना चाहोगे उसका डर उतना खत्म होगा…!

अब आते है सही जगह आखिर कुछ इंसान अपनी ही सोच से क्यों परेशान होते है..या फिर कौन सी सोच हमारे लिए बहुत खराब होती है….जब भी आप कुछ सोचते हो तो आपको जरूर पता होगा की आप किस चीज़ के बाड़े मैं इतना सोच रहे हो …मतलब ये की आप वास्तविक #reality ) के बाड़े मैं सोच रहे हो या बस #belive कर रहे हो …कहने का मतलब ये की आप जो अभी हो या फिर अभी आप क्या कर रहे हो उस बाड़े मैं या फिर आप जो नहीं हो उस बाड़े मैं तो आपको खुद ही मालूम पड़ेगा की आप जो सोच रहे हो वो गलत सोच रहे हो ….मतलब सोच को गलत ना रखो सोच को सही बनाओ
अभिनव

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